यूवा



Educational Reforms

Education is the most important national mission. It is the backbone of the country’s progress.At present what I personally feel it is outdated and unrealistic.It has outlived its utility.I believe we all want to reform our present education system.
It is better to light candle one than to curse darkness.
Let’s make our mind to be the change agents.
If changes are brought about,the private tuitions n coaching shops might become useless.
Their won’t be any place for them n our youth will save money,time n energy all in one shot.
The need is to make education socially relevant and responsive to the development n needs of the country.
Cramming of text material should be replaced by innovative work n value based teaching learning material.Students should be strictly channelised at ninth class stage into academic and vocational streams.The enterance exam syllabus must be related with senior school boards syllabus.we must also work on attitude of students.Marks should not be the only criteria to judge and evaluate their performance.Skills are totally neglected at higher level competition examination.
The result we all know ,we are becoming country of educated illiterates!!!!!!!!.
MACULAY is a winner even after so many years of independence.
My humble request is for our Govt also to support willing n intelligent students to join job related courses if they are unable to deposit heavy fee.Of course merit must be on Top Priority.
We all if think to make our youth skilled must join hands to reform present education system.
No detention policy is cancerous,must be discontinued.
Institutes of all level must have all faculty.
I have noticed there are even upto 60%vacancies n no faculty provided then how can we blame our students if they don’t perform well.
Madhu Ved
Former Principal Sr Sec School Vidya Bharti Delhi,
Director Vidvat Parishad Delhi State.






हिंदी की विकास यात्रा

हिंदी भाषा का नाम लेते ही मन रोमांच से परिपूर्ण हो जाता है | इसलिए तो कहा है -
"सुंदर है, मनोरम है, मीठी है, सरल है,

ओजस्विनी है और अनूठी है ये हिन्दी ||"
हिंदी भाषा केवल भाषा नहीं है, अपितु सभी भाषाओं में लोकप्रिय होने के साथ जनमानस के पटल पर ऐसे अंकित है, जैसे शब्दों में बिंदी रहती है | कोई भी भाषा सदैव एक-सी नहीं रहती है, बल्कि समय के अनुसार अपने में परिवर्तन करते हुए निरंतर विकास के पथ पर अग्रसर रहती है | हिंदी भाषा इतनी उदार है कि इसने उर्दू, अरबी, फारसी आदि सभी भाषाओ के शब्दों को अपने में समाहित किया हुआ है और फिर भी प्रफुल्लित और पुष्पित है | हिंदी की आदि जननी ‘संस्कृत’ है | परन्तु इसके इतिहास का आरम्भ ‘अपभ्रंश भाषा’ से माना जाता है | मूलतः 'हिंदी' फारसी शब्द है | जिसका अर्थ- 'हिंदी की' या 'हिन्द' से संबंधित है | पूर्वकाल में देखा जाये तो अंग्रेजों ने अंग्रेजी भाषा का प्रचुर मात्रा में प्रसार किया और उसका स्थापित्य करने में ही योगदान दिया | परन्तु स्वाधीनता के बाद हिंदी के प्रसार ने गति पकड़ी और अपने विकास की यात्रा शुरू की |

बहुभाषिकता की दृष्टि से देखा जाये तो भारत में कई भाषाएँ संपर्क भाषा का काम करती हैं । प्राचीन भारत में यह भूमिका संस्कृत ने निभाई और आधुनिक भारत में यह काम हिंदी कर रही है । यह भी देखा जा सकता है कि जब-जब भारत में कोई आंदोलन खड़ा हुआ, तब-तब उन आंदोलनों में हिंदी भाषा को अपनाया। यही आवश्यकता 19वीं-20वीं शताब्दी में स्वतंत्रता आंदोलन में भी देखी जा सकती है । इसलिए महात्मा गाँधी और अन्य ने हिंदी को राष्ट्रभाषा के रूप में प्रतिष्ठा प्रदान की और यही आधार राजभाषा के रूप में भी हिंदी की प्रतिष्ठा का रहा। आज 21वीं शताब्दी में हिंदी भाषा अपनी इन्ही विशेषताओं के कारण वैश्विक विस्तार के नए आयाम छू रही है | इसे हिंदी के संदर्भ में संचार माध्यम की बड़ी देन कहा जा सकता है। तकनीकी क्षेत्र में भी हिंदी की बहार दिखाई देती है | जैसे- सोशल नेटवर्किंग और ब्लॉगिंग में । जिस अंदाज में हिंदी विश्व ने फेसबुक को अपनाया है, वह अद्भुत है । डॉ. वेदप्रताप वैदिक ठीक कहते हैं कि- "हिन्दी और संस्कृत मिलकर संपूर्ण कम्प्यूटर-विश्व पर राज कर सकती हैं। वे इक्कीसवीं सदी की विश्वभाषा बन सकती हैं।" कंप्यूटर और इंटरनेट पर भी हिंदी ने अपना सिक्का जमा दिया हैँ। इस समय हिंदी में वैबसाइटे, ईमेल, चैट तथा अन्य हिंदी सामग्री उपलब्ध हैं । इसी प्रकार मोबाइल फ़ोन पर भी हिंदी भाषा प्रयोग की जा रही है।

इसके अलावा हिंदी का कुंजी पटल भी उपलब्ध हो गया है । इसलिए हम गर्व से कह सकते है-
“मेरा तन-मन-धन, मेरी पहचान है हिंदी
सारी भाषाओ को प्रस्फुटित करने वाली
हर भारतीय का स्वाभिमान है हिंदी ||”
हिंदी भाषा के इस विस्तार में यह निहित है कि गतिशीलता हिंदी का बुनियादी चरित्र है और हिंदी अपनी लचीली प्रकृति के कारण स्वयं को आसानी से बदल लेती है। यह प्रवृत्ति हिंदी के निरंतर विकास का आधार है और जब तक यह प्रवृत्ति है तब तक हिंदी का विकास रुक नहीं सकता। इसलिए यह आवश्यक है कि हम हिंदी का प्रयोग अधिक से अधिक करें, ताकि हिंदी का विकास निरन्तर होता रहे ||

पुष्पा तिवारी
एहल्कॉन इंटरनेशनल स्कूल
मयूर विहार फेस -1 , दिल्ली- 110091


Shradha Pandey

प्रकाशित पुस्तकें -सतरंगी दुनिया के अठरंगी सपने, समय की रेत पर, हाथी मेरे साथी ,झिलमिल तारे, आँखों में तारे

प्रकाशित कहानियाँ- नवनीत में, बाल भारती में, न्ंदन में, बाल प्रहरी में , बालवाणी में, मार्डेन एजूकेशन में, साहित्य गंधा में, गुफ्तगू में

सम्मान - गोमती गौरव सम्मान, शब्द शिल्पी सम्मान, वामा सम्मान, अखिल भारतीय अणुव्रत न्यास सम्मान, पंडित शिव प्रसाद शिक्षक साहित्यकार सम्मान ,




प्रकाशित पुस्तकें - सतरंगी दुनिया के अठरंगी सपने, समय की रेत पर, हाथी मेरे साथी ,झिलमिल तारे, आँखों में तारे
प्रकाशित कहानियाँ- नवनीत में, बाल भारती में, न्ंदन में, बाल प्रहरी में , बालवाणी में, मार्डेन एजूकेशन में, साहित्य गंधा में, गुफ्तगू में
सम्मान - गोमती गौरव सम्मान, शब्द शिल्पी सम्मान, वामा सम्मान, अखिल भारतीय अणुव्रत न्यास सम्मान, पंडित शिव प्रसाद शिक्षक साहित्यकार सम्मान ,


सोशल मीडिया का सामाजिक दायित्व

आज सोशल मीडिया से कौन अपरिचित होगा ? सोशल मीडिया संवाद का एक सशक्त माध्यम बनकर लोगो की ताकत बन चुका है । इसके द्वारा हम दुनिया के किसी भी कोने में बैठे लोगों से वार्ता कर सकते हैं । यह केवल बातचीत का ही साधन नहीं है, अपितु इसके द्वारा हम अपने विचारों को दुनिया के समक्ष रखकर, उनके विचारों को समझकर, दुनियाभर की तमाम गतिविधियों से भी अवगत होते हैं। सोशल मीडिया ने हमारी जीवनशैली को पूर्णतः बदलकर रख दिया है। हमारे अधितकर कार्य आदि इसी के माध्यम से हो रहे है | यदि एक वाक्य में कहे तो आज पूरी दुनिया में इसका वर्चस्व कायम हो चुका है | कहा जाता है कि "एक म्यान में एक ही तलवार रह सकती है", परन्तु देखे तो आज सोशल मीडिया की एक म्यान में अनेक तलवारें जैसे: फेसबुक, ट्वीटर, आरकुट, माई स्पेस, लिंक्डइन, फ्लिकर, इंस्टाग्राम आदि एक-साथ बैठी मुस्करा कर लोकप्रिय हो रही है |


सोशल नेटवर्किंग सभी की जिंदगी का एक अहम अंग बन गया है। हम किसी न किसी रूप में प्रयोग करते हैं। अब तो भारत के गांवों में भी सोशल मीडिया का क्रेज दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है। यह जहां एक तरफ हमारे सपनों को एक नयी दिशा दे रहा है वही दूसरी ओर उन्हें साकार करने के लिए माध्यम भी उपलब्ध करा रहा है। आज इसका प्रयोग राजनीतिक, सामाजिक, फिल्मों के ट्रेलर, टीवी प्रोग्राम का प्रसारण या शैक्षिक सभी क्षेत्रों में हो रहा है | उल्लेखनीय है कि कितने ही मार्मिक मामलों में भी इसकी भूमिका को नाकारा नहीं जा सकता | जहां सारे राष्ट्र ने एकजुट होकर 'अनेकता में एकता' के सूत्र को परिभाषित किया है |


हालांकि अति तो किसी भी चीज की ठीक नहीं होती। जिस प्रकार एक सिक्के के दो पहलू होते है. उसी प्रकार सोशल मीडिया के अच्छे प्रभावों के साथ-साथ उसके दुष्प्रभावों को भी नाकारा नहीं जा सकता है | सृष्टि का नियम भी तो यही है कि,'' किसी से उतना ही लो, जितना आपकी ज़रूरत हो |" अगर ज्यादा लिया तो वह हमारे लिए ही हानिकारक है | सोशल मीडिया का विकास जहाँ हमें इतना कुछ दे रहा है, वहीं बहुत कुछ छीन भी रहा है। यह हमारे ऊपर है कि हम किस प्रकार इससे लाभ ज्यादा और हानि कम उठायें। जहाँ यह सामाजिक सम्बन्धो को परिपक़्व कर रहा है, वहीं इसके बहाने लोगों ने एक-दूसरे से मिलना भी छोड़ दिया और उनका मिलन यही तक सीमित होकर रह गया है । कुछ लोग इसके जरिये देश में अशांति व द्वेष फैलाने का बुरा कर्म तो करते हैं। साथ ही नकली एकाऊण्ट बना कर अपहरण, हत्या जैसी साजिशों को भी तूल देते है । अतः हमें इस प्रकार के झांसों से बचना चाहिये और सोशल मीडिया का उपयोग सोच-समझ कर करना चाहिये, अन्यथा यह हमारे लिए अशांति व मानसिक तनाव का कारण भी बन सकता है।


अतः एक सजग नागरिक के रूप में हमारा दायित्व यह है कि हम जो भी करे 'बहुजन हिताय' के भाव से करे | हमारे कर्म में 'वसुदेव कुटुंबकम' की भावना निहित हो | अगर सबकी सोच इसी पर आधारित हो तो सोशल मीडिया एक सशक्त कलम के रूप में व्यक्ति की, समाज की, राष्ट्र की उन्नति में सहायक होगा |


पुष्पा तिवारी
एहल्कॉन इंटरनेशनल स्कूल
मयूर विहार फेस -1 , दिल्ली- 110091


विज्ञापन
विज्ञापन