सोशल मीडिया का सामाजिक दायित्व

सच्ची लोकतांत्रिक व्यवस्था में मीडिया एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐतिहासिक रूप से मीडिया का विकास लोगों को सूचित, शिक्षित और मनोरंजन करने के लिए हुआ है।भारत में आजादी से पूर्व युग में, मीडिया को सामाजिक परिवर्तन के एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया गया था। राजाराममोहन रॉय , जुगलकिशोर शुक्ल , बंकिमचंद्र चटर्जी , राजा शिवप्रसाद सितारेहिन्द , निखिल चक्रवर्ती , मुंशी प्रेमचंद और शरतचंद्र चट्टोपाध्याय जैसे महान कलमकारों ने पत्र-पत्रिकाओं को जनजागरण का अहम् हथियार बनाया जिनका उद्देश्य था - समाज में व्याप्त विसंगतियों को दूर करना। तत्कालीन पत्रकारों के इस अमिट योगदान को बयाँ करने के लिये महान् कवयित्री महादेवी वर्मा ने भी लिखा है ,“पत्रकारों के पैरों के छालों से आज का इतिहास लिखा जाएगा”| मशहूर शायर अकबर इलाहबादी ने कहा है - “खींचों न कमानों को न तलवार निकालो , जब तोप मुकाबिल हो तो अखबार निकालो” |

जागरुकता फैलाने का कार्य , मीडिया ने अपनी ज़िम्मेदारी पूरी तरह से निभाई है।लोगों को वोट डालने के लिये प्रेरित करना,बाल मज़दूरी पर रोक लगाने के लिये प्रयास करना,धूम्रपान के खतरों से सावधान कराना,पौधा रोपण तथा पर्यावरण प्रदूषण के खतरों से आगाह कराना, जैसे अनेक कार्यों में मीडिया की भूमिका सराहनीय है।मीडिया समय-समय पर नागरिकों को उनके अधिकारों के प्रति सचेत रहने के लिए जागरुकता और प्रेरणा देता रहता है क्योंकि समाज को सही दिशा देना मीडिया का उत्तरदायित्व है।

अतः आज आवश्यकता है ऐसी प्रणाली विकसित करने की जिससे मीडिया में प्रतिभा सम्पन्न और सामाजिक उत्तरदायित्व निभाने वाले एवं देश के प्रति निष्ठावान लोग ही इस पेशे में रह सकें और अपनी जिम्मेदारियों को इमानदारी व सजगता पूर्वक निभाएं ताकि हमारा देश उन्नति व प्रगति के पथ पर अग्रसर हो सके | अंत में केवल इतना ही कहना चाहूँगी – जिस प्रकार दीपक बोलता नहीं उसका प्रकाश परिचय देता है | उसी प्रकार अपने कार्यों के बारे में कुछ न बोले , अच्छे कर्म करते रहें ,वही आपका परिचय देंगें |

शिखा सक्सेना
एह्ल्कान इंटरनेशनल स्कूल




विचार मंच

सोशल मीडिया का सामजिक दायित्व
-सुनीता राजीव


एक क्लिक आपको दुनिया के किसी भी कोने से जोड़ सकता है I विचारों को पृथ्वी के दूसरे भाग में पहुंचाने में आज पलक झपकने का समय भी नहीं लगता।सोशल मीडिया ने जनमानस को समसामयिक मुद्दों से जोड़ने का अद्भुत भूमिका निभाई है I समाचार आपको तथ्यों की जानकारी देते हैं पर सोशल मीडिया आपके विचारों को गढ़ने का अनमोल रोल निभाती है।


फेसबुक , इंस्टाग्राम से ले कर व्हाट्स एप्प तक ,ब्लॉग से ले कर यू ट्यब तक , सभी की उपयोगिता और नशे ने हमारी जीवन के कई घंटे अपने नाम नीलाम कर रखे हैं।


व्हाट्स एप्प के छोटे बड़े सन्देश,दो या तीन मिनट के वीडियो ,हमारी सोच ही बदल देते हैंI ३ मई २००९ को भारत में व्हाट्स एप्प आया और आज के समय में १५ मिलियन लोग भारत में ही इसे इस्तेमाल कर रहे है। इसके पहले २६ सितम्बर २००६ से फेसबुक ही हर दिल अज़ीज़ था I


विवेकानंद ने कहा था-"दूसरों से वो सब सीखो जो उनके पास अच्छा है ,पर उस शिक्षा को अपने परिवेश के अनुसार ढालो , उनकी परछाईं बन कर ना रह जाओ। " आज सोशल मीडिया को इस कथन का मर्म पहचानना है। देश में अलगाववादी ताकतें सोशल मीडिया को अपना हथियार बना कर ऐसे बीज बो रही हैं कि आज का युवा भी दिग्भ्रमित होता जा रहा है। लोगों के विश्वास पर गाज तब गिरी जब ४ अप्रैल २०१८ के फेसबुक के ८७ मिलियन चहेतों को पता चला कि उनकी निजी जानकारियों को आम कर दिया गया है। सोशल मीडिया के ठेकेदार अरबों कमा रहे हैं पर अपनी ज़िम्मेदारियों के प्रति सजग नहीं हैं.


समाज में क्या वीभत्स हो रहा है ,कितने षड़यंत्र रचे जा रहे हैं , कहाँ के अध्यापक अज्ञानी या क्रूर हैं -ऐसे वीडियो और मैसेज बहुत जल्दी वायरल होते हैं। पर समाज में क्या भला हो रहा है, उसके सन्देश कभी कभी ही आते हैं।


सोशल मीडिया आज हमारे जीवन का अपरिहार्य अंग है। इस अंग को अपना वजूद पूरे शरीर के स्वास्थय के लिए उपयोगी बनाना होगा। ज़रा सी बीमारी हमारे जीवन को दुष्कर बना देती है। बहुजन हिताय बहुजन सुखाय के आदर्श को अपनाने पर ही सोशल मीडिया रामबाण का काम कर सकती है अन्यथा आने वाले समय में ये रोग का रूप ले लेगी।

 

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